किमते बढ़ी: युद्ध का असर बीकानेर के इन सामानों पर, फंसा करोड़ों रुपये का माल
किमते बढ़ी
हैलो बीकानेर। युद्ध का असर वैसे तो पूरी दुनिया पर पड़ा है लेकिन भारत के राजस्थान राज्य के बीकानेर जिले पर भी युद्ध का काफी गहरा असर पड़ा है। बीकानेर को पूरी दुनिया बीकानेरी नमकीन की वजह से भी पहचानती है। उसी नमकीन पर युद्ध का गहरा असर पड़ने लगा है। बीकानेर से नमकीन का निर्यात करना मुश्किल हो रहा है।
व्यापारियों को भुजिया, पापड़ जैसी नमकीन व मसालों सहित दूसरे समान को भी भेजने में काफी दिक्कतें हो रही है। बीकानेर के नमकीन उत्पादों का खाड़ी व यूरोप के देशों में बड़ी मात्रा में निर्यात होता है मीडिया रिपोर्ट के अनुसार युद्ध की वजह से सामान भेजने में देरी हो रही है। साथ ही माल ढुलाई की लागत बढ़ी है और कंटेनरों की भी कमी है।
रिपोर्ट में मिली जानकारी के अनुसार कच्चे माल और डुलाई की बढ़ती कीमतों की वजह से नमकीन व्यपार को काफी नुकसान हो रहा है। जिस खाद्य तेल से नमकीन बनते है वो खाद्य तेल लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ गया है वही कंटेनरों का आवागम काफी धीमा हो गया है। पहले निर्यात किया हुआ माल लगभग के महीने में पहुँच जाता था लेकिन युद्ध की वजह से माल को सुरक्षित रास्तों से भेजा जा रहा है जिससे माल को पहुँचने में दो महीने लग रहे है।
एक नमकीन निर्यातक के अनुसार माल को मँगवाने और भेजने दोनों में समय लग रहा है। जिससे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है जिससे लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है। अरब देखों बीकानेर की नमकीन और मसालों की मांग बढ़ी है लेकिन उस मांग की आपूर्ति पूरी नहीं होने की वजह से काफी नुकसान हो रहा है। व्यापारियों ने यह भी बताया की सोयाबीन और पाम ऑयल के आयात पर भी गहरा असर पड़ रहा है।
तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से पैकिंग की लागत तीस चालीस प्रतिशत बढ़ गई है। एक अनुमान के अनुसार बीकानेर से प्रति माह भुजिया, पापड़ और नमकीन के 15 से 20 कंटेनर निर्यात किए जाते हैं। दूसरे सामान के लगभग 60 कंटेनर भी बाहर भेजे जाते हैं। करोड़ों रुपये की खेप बंदरगाहों पर या रास्ते में अटकी हुई हैं।
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