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हमारी जेल में सुरंग: सिलेंडरों की मारामारी के बीच कांग्रेस-भाजपा

बीकानेर में भी बनेगी एक नई विधानसभा सीट

2 months ago
सिलेंडरों की मारामारी के बीच कांग्रेस-भाजपा

हमारी जेल में सुरंग


हैलो बीकानेर। 'हमारी जेल में सुरंग? डायलॉग की थीम इन दिनों बीकानेर की जेल पर लागू हो रही है। जब-जब इस जेल में कुछ संदिग्ध होने की जानकारी मिलती है, लेकिन मिलता नहीं है। आखिर कौन है जो पुलिस के आने की सूचना दे देता है। कुल मिलाकर बीकानेर के केंद्रीय कारागार में या तो कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है, जिसकी पुलिस से तगड़ी सांठगांठ है, जिसकी वजह से दो बार की सूचना के बाद भी जेल में कुछ नहीं मिला है।

अगर ऐसा है तो यह खतरनाक संकेत हैं और अगर ऐसा नहीं है तो सूचनाएं देने वाला कोई मसखरा है, जिसे जितना जल्दी हो सके पुलिस को कंट्रोल करना चाहिए। इस तरह के लोगों पर विश्वास करना हास्यास्पद बन जाता है। इस सप्ताह फिर से पुलिस केंद्रीय कारागार में गई, यह दूसरी बार था, जब खाली हाथ लौटना पड़ा।

पीबीएम अस्तपाल में इलाज के लिए भटकते राजेंद्र राणा की मौत हो गई और एसपी ऑफिस के सामने खाजूवाला के रामलाल मेघवाल ने आत्मदाह कर लिया। 80त्न जल चुके इस व्यक्ति को भी नहीं बचाया जा सका, अगले दिन उसने दम तोड़ दिया। ये दोनों घटनाएं सरकारी मशीनरी पर तमाचा है। हालांकि, इस बीच बीकानेर का एसपी बदल गया है। कावेंद्र सागर की जगह मूल गंगाशहर के मृद़ल कच्छावा को जिले की कमान दी गई है। सोशल मीडिया पर मृदुल कच्छावा का स्वागत संभावना के रूप में हुआ है, देखना है कि बीकानेर की रगों में दौड़ रहे नशे और रोजगार बन चुके जुअे-सट्टे पर कितनी रोकथाम लग पाती है।

यकीनन, इस शहर को अच्छे अधिकारी चाहिए। बतौर संभागीय आयुक्त नीरज के. पवन को बीकानेर याद ही इसलिए करता है कि उन्होंने देखते ही देखते बीकानेर शहर को चलने-फिरने योग्य बना दिया। नेताओं से हताश इस शहर को अधिकारियों से उम्मीद है। ऐसी उम्मीद जिला पुलिस अधीक्षक से भी है।
और अगर उम्मीद है तो गैस वालों से है। नब्बे का दशक याद आ गया है जब जिस व्यक्ति के एलपीजी एजेंसियों में लगे कार्मिकों और हॉकरों से संबंध होते थे, उनकी समाज में काफी पैठ होती थी। ऐसे में एजेंसियों से अगर लाइजनिंग है तो बात की क्या, लेकिन धीरे-धीरे यह समस्या नहीं रही। पता चला कि अब तो गैस लाइनें आ रही है।

खुशियां मना ही रहे थे कि युद्ध शुरू हो गया। कममिर्शियल गैस की बुकिंग बंद और घरेलू गैस की सप्लाई की मियाद बढ़ा दी गई। संपर्कों को ताजा करने की कोशिश की गई तो पता चला कि कार्मिक एजेसियां छोड़ गए हैं और हॉकर बदल गए हैं। लिहाजा जिन लोगों ने ब्लैक में सिलेंडर खरीदने चाहे, उन्हें 1500 रुपये तक चुकाने पड़े। मंत्री सुमित गोदारा जरूर कहते रहे कि पैनिक बुकिंग नहीं करावें, लेकिन चूल्हें और स्टोव को अलविदा कह चुके लोगों को वापस उस दुनिया में जाने की सोच से ही बेचैनी होने लगी। बिजली से चलने वाला चूल्हा विकल्प के रूप में सामने आया, लेकिन इसमें बिजली की खपत ज्यादा होने की बात चली।

इस किल्लत को भुनाने कांग्रेस ने प्रदर्शन किया तो भाजपा वालों ने काउंटर करते हुए साबित करने का प्रयास किया कि सबकुछ सही है। लोकतंत्र में सरकारों को कुछ करना ही नहीं पड़ता, सत्ताधारी संगठन की पार्टियां ही कवच बन जाती है। आधी जनता तो वैसे ही पक्ष में।

आधा शहर विक्रम संवत को हिंदू नववर्ष मनाने की तैयारी में है। गणगौर चल रही है। ईद आने वाली है। विक्रम संवत पर रैली निकाली जाएगी, इस दिन राजस्थान दिवस मनाने का फरमान भी जारी हुआ है, क्योंकि राजस्थान दिवस की तिथि वर्ष प्रतिपदा थी, उस दिन 30 मार्च था तो पिछले साल तक 30 मार्च को राजस्थान दिवस मनाया जाता रहा। अब से विक्रम संवत की शुरुआत पर। अंदर खाने बात यह है कि 30 मार्च को क्लोजिंग की वजह से बजट आदि जारी करने में परेशानी होती थी, इसलिए यह सुझाव दिया गया कि बिल वगैरह जो-जितने बनेगे समय पर पास हो जाएंगे।

बहरहाल, नये साल के लिए शहर सजा हुआ है। युवकों की टोलियां शहर में घूम रही है। इस अवसर पर निकलने वाली धर्मयात्रा का राजनीतिक महत्व भी माना जाने लगा है। धर्मयात्रा की राजनीति के बीच भाजपा के नेता विजय मोहन जोशी का पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलना बीकानेर की राजनीति में हलचल भरा है। राजनीतिक पृष्ठभूमि और वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए कयासों के बाजार गर्म है।

राजस्थान में 70 और विधानसभा सीटों की गुंजाइश निकल रही है। एक तो बीकानेर के पांति भी आएगी। परिसीमन के प्रारंभिक समीकरणों में बंगलानगर से होते हुए सर्वोदय बस्ती, मुक्ताप्रसाद नगर, जिसे इस तरह भी समझा जाता है कि जैसलमेर रोड हाइवे की परली-साइड विधानसभा उत्तर के रूप में सामने आ सकता है। चुनाव हालांकि अभी दूर है, लेकिन तैयारी करने से किसने रोका है। अटल बिहारी वाजपेयी की कविता है—
माना कि अंधेरा घना है, मगर

दिया जलाना कहां मना है 
(साप्ताहिक विनायक से साभार)

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