पुष्करणा समाज की बेटी ने किया नाम रोशन: शिवानी पुरोहित ने रचा इतिहास, युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
रेलवे से जुड़ी है पारिवारिक विरासत
पुष्करणा समाज की बेटी ने किया नाम रोशन
हैलो बीकानेर। मारी छोरी क्या छोरों से कम है की यह लाइन दंगल फिल्म को वो लाइन है जिसे देश की कई बेटियों ने सही साबित कर बताया है। लड़का होने की चाह में जहां कई बेटियो को गर्भ में मार दिया जाता है वहाँ देश के कई समाजों की बेटियों ने यह साबित कर बताया है की उन्हें लड़कों से कम नहीं आकना चाहिए। बीकानेर के पुष्करणा समाज में जन्मी शिवानी ने भी एक ऐसी ही मिशाल पेश की है।
बीकानेर शहर की होनहार बेटी शिवानी पुरोहित ने भारतीय रेलवे में सहायक लोको पायलट बनकर परिवार और समाज का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे पुष्करणा समाज में और क्षेत्र में खुशी की लहर है। यह पुष्करणा समाज की पहली बेटी है जो इस पद पर पहुंची है जबकि बीकानेर जिले की तीसरी महिला लोको पायलट नियुक्त हुई है इससे पहले बीकानेर की दो बेटियां लोको पायलट बन चुकी है।
रेलवे से जुड़ी है पारिवारिक विरासत
शिवानी के पिता योगेन्द्र कुमार पुरोहित पेशे से एडवोकेट हैं, वहीं माता सपना पुरोहित B.Com. शिक्षित हैं। उनके दादा स्व. बद्री नारायण पुरोहित वर्ष 1992 में लोको पायलट पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
विशेष बात यह है कि उनके दादा बद्री नारायण पुरोहित के नक्शे कदम पर चलते हुए शिवानी ने लोको पायलट बनना तय किया। वे पुष्करणा समाज की पहली महिला लोको पायलट के रूप में अब पहचानी जाएगी। शिवानी से पूर्व पुष्करणा समाज की कोई भी युवती या महिला रेलवे में लोको पायलट के रूप में चयनित नहीं हुई है। यह रिकॉर्ड अब शिवानी पुरोहित के नाम दर्ज हो गया है।

ट्रेनिंग में किया शानदार प्रदर्शन
शिवानी की नियुक्ति 15 दिसंबर 2025 को हुई। इसके बाद उन्होंने जोधपुर के भगत की कोठी में 15 दिसंबर से 8 फरवरी तक ट्रेनिंग ली, जहां वे बीकानेर और जोधपुर डिवीजन की क्लास मॉनिटर रहीं।
इसके बाद उदयपुर स्थित ZRTC में 1 फरवरी से 2 अप्रैल तक चली ट्रेनिंग में उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 237 प्रशिक्षुओं में 34वीं रैंक हासिल की। इसके बाद पुनः जोधपुर (भगत की कोठी) में ट्रेनिग ली।

बीकानेर डिवीजन में होगी पदस्थापना
ट्रेनिंग पूरी होने के बाद शिवानी पुरोहित की नियुक्ति बीकानेर डिवीजन में की जाएगी। उनको बीकानेर डिविजन अलॉट हुआ है।

युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
शिवानी की यह सफलता न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि क्षेत्र की बेटियों के लिए भी प्रेरणा है। उन्होंने साबित कर दिया कि मेहनत और लगन से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
बकौल शिवानी, यदि देश का युवा ठान ले तो कोई काम असंभव नही है। मैंने दादाजी की तरह ट्रेन की लोको पायलट बनने का सपना देखा था जो अब साकार हो गया है। इसके लिए मेरे पापा व मम्मी की प्रेरणा व सहयोग मिला जिसे कभी भूल नही सकती।
- ड्राइवर की सहायता : ट्रेन चलाने में मुख्य लोको पायलट की मदद करना, विशेषकर लंबी दूरी की यात्राओं में।
- सिग्नल और ट्रैक की निगरानी : ट्रैक पर नजर रखना और सिग्नलों को देखकर लोको पायलट को सूचित करना, जो दुर्घटनाओं को रोकने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
- इंजन का निरीक्षण : ट्रेन चलने से पहले और रास्ते में इंजन के कल-पुर्जों की तकनीकी जांच करना।
- तकनीकी ट्रबलशूटिंग : यदि यात्रा के दौरान इंजन में कोई तकनीकी खराबी आती है, तो उसे ठीक करने में मदद करना।
- संचार : गार्ड, स्टेशन मास्टर और अन्य अधिकारियों के साथ वॉकी-टॉकी के माध्यम से संवाद बनाए रखना।
- सुरक्षा नियम : रेलवे के परिचालन संबंधी सुरक्षा नियमों (Operational Safety Rules) का पालन सुनिश्चित करना।
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