फुटेज और हुलिए: से ट्रेस होंगे बदमाश, जल्द मिलेगी लोकेशन
अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सहारा ले रही है।
फुटेज और हुलिए
(एजेंसी) अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सहारा ले रही है। जोन-2 में डीसीपी कुमार प्रतीक की पहल पर तैयार किया गया एआई आधारित सॉफ्टवेयर पायलट प्रोजेक्ट में सफल रहा है। इसके बाद अब इसे पूरे जोन में लागू करने की तैयारी है। पहले वारदात के बाद पुलिस टीमों को सैकड़ों फुटेज खंगालना पड़ते थे। इसमें काफी समय लगता था। अब इस नई तकनीक से काम मिनटों में होगा।
कोई वारदात होती है तो घटना स्थल के आसपास लगे सभी कैमरों की फुटेज एआई आधारित सॉफ्टवेयर में डाले जाएंगे। बदमाशों के हुलिए, कद-काठी, कपड़े या वाहन जैसी जानकारी कमांड के रूप में दर्ज की जाएगी। कमांड मिलते ही एआई सिस्टम सभी फुटेज को स्कैन कर संदिग्धों को ट्रेस कर लेगा। इससे बदमाशों की लोकेशन, आने-जाने का रास्ता, समय और गतिविधियों की सटीक जानकारी मिल सकेगी। पुलिस ने इस तकनीक का ट्रायल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किया, जो सफल रहा।
डेटा भी रहेगा शामिल
सॉफ्टवेयर को और मजबूत बनाने के लिए शहर के कुख्यात बदमाशों, चोरों और स्नैचरों का डेटा भी फीड किया जा रहा है। पुराने रिकॉर्ड, थ्री-डी फाइलें और अपराधियों की जानकारी इसमें जोड़ी जा रही है। इससे बदमाश की पहचान और ज्यादा सटीक हो सके।
बिना इंटरनेट चलेगा सॉफ्टवेयर
खास बात यह है कि यह सॉफ्टवेयर बिना इंटरनेट के भी काम करेगा। पुलिस दो तरीकों से इसमें इनपुट दे सकेगी। फुटेज आधारित सर्च : घटना स्थल से संदिग्ध का वीडियो मिलता है तो उसी फुटेज को सॉफ्टवेयर में डालकर कमांड दी जाएगी। इससे सॉफ्टवेयर द्वारा बाकी कैमरों में उसकी गतिविधियों को ट्रैक किया जाएगा।
हुलिया आधारित सर्च : यदि घटना स्थल पर कैमरा फुटेज उपलब्ध नहीं है तो फरियादी के बताए अनुसार (जैसे लंबाई, दाड़ी-मूछ, बदमाश का रंग, कपड़ों का रंग, वाहनों का रंग व प्रकार बाइक) जानकारी देकर एआई संदिग्धों को खोज निकालेगा।
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