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प्रयास संस्थान ने किया पांच राजस्थानी के साहित्यकारों का सम्मान

5 months ago
प्रयास संस्थान ने किया पांच राजस्थानी के साहित्यकारों का सम्मान

हैलो बीकानेर न्यूज़ नेटवर्क, www.hellobikaner.com,                     चूरू। राजस्थान धरोहर प्राधिकरण अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत चूरू आए और जिला मुख्यालय स्थित सूचना केंद्र में प्रयास संस्थान की ओर से आयोजित राजस्थानी साहित्यकार सम्मान समारोह में शिरकत कर साहित्यकारों का सम्मान किया। इस मौके पर संबोधित करते हुए प्राधिकरण अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने कहा कि राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए हम सतत् प्रयत्नशील हैं। साथ ही क्षेत्रीय भाषाओं के संवर्द्धन के लिए भी प्रयास हम सभी को करना होगा। हमें आपस में अपनी मायड़ भाषा में बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां भाषा और संस्कृति की बात आए, सभी मतभेद भुलाकर एक होना चाहिए।

 

इस अवसर पर उन्हें बतौर राज्यसभा सांसद सदन में राजस्थानी भाषा को मान्यता दिए जाने संबंधी मुद्दे उठाए जाने की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार भोजपुरी और राजस्थानी को मान्यता देने के लिए तैयार है, लेकिन प्रक्रिया का पालन होने में कई बार देर हो जाती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश सरकार साहित्य, भाषा और संस्कृति के संरक्षण एवं प्रोत्साहन के लिए निरंतर कार्यशील है। राजस्थानी भाषा हमारी पहचान, गौरव और ऐतिहासिक धरोहर का केंद्र है।

 

उन्होंने कहा कि प्राधिकरण लोकदेवता तेजाजी, महाराणा प्रताप, मीराबाई, करमा बाई, पाबूजी के विचारों, गीतों सहित अपनी समृद्ध विरासत व धरोहर के संरक्षण के लिए कार्ययोजना पर काम कर रही है। हमारी सरकार लगभग 12 करोड़ रुपए की लागत से मेड़ता में मीराबाई भक्ति सर्किट के निर्माण की प्रक्रिया कर रही है। इसमें सभी लोक देवी—देवताओं की भक्ति रचनाओं को आधुनिक तकनीकी विधाओं के ​माध्यम से प्रदर्शित करने की कार्ययोजना पर गंभीरता से विचार कर रही है और उसकी तकनीकी प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। इसी क्रम में महाराणा प्रताप के सर्किट सहित महापुरूषों के पैनोरमा व स्मारकों के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

 

 

राजस्थानी भाषा की मान्यता के बारे में चर्चा करते हुए लखावत ने कहा कि हम राजस्थानी भाषा में समृद्ध साहित्य पर सामूहिक रूप से सभी वर्गों के साथ मिलकर योजना को सफल बनाने में लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में दिया जाना प्रारंभ किया गया है। इसी क्रम में राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में बोली जाने वाली भाषा व बोलियों में पाठ्यक्रम तैयार ​कर प्रारंभिक शिक्षा दी जा रही है। मातृभाषा की समृद्धि के लिए उठाया गया बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि हम सभी वचनबद्ध होकर सामूहिक प्रयासों से समाज को समृद्ध विरासत दें। उन्होंने कहा कि साहित्यकार अपने लेखन से आने वाली पीढ़ियों को न केवल भाषा से जोड़ते हैं, बल्कि उन्हें सांस्कृतिक जड़ों से भी परिचित कराते हैं। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि बीकानेर से आए साहित्यकार हरीश बी. शर्मा ने कहा कि राजस्थानी की मान्यता के लिए जन आंदोलन खड़ा करना होगा। यह अच्छा है कि सरकार मान्यता के विषय पर सोच रही है, लेकिन जनचेतना के बगैर यह काम लंबित ही रहेगा।

 

 

प्रयास संस्थान के अध्यक्ष दुलाराम सारण ने इस अवसर पर प्रयास संस्थान द्वारा आयोजित किए जाने वाले समारोह में अब तक सम्मानित होने वाले साहित्यकारों की जानकारी देते हुए कहा कि राजस्थानी भाषा और साहित्य के विकास हेतु सरकार के और प्रयास जरूरी है। इस अवसर पर साहित्यकार नागराज शर्मा को कन्हैयालाल रतनलाल पाराख सहित्य पुरस्कार, डॉ.मदन सैनी को बैजनाथ पंवार कथा साहित्य पुरस्कार, संतोष चौधरी को सावित्री चौधरी खुमसिंह साहित्य पुरस्कार, सगमानंद को मोहन आलोक साहित्य पुरस्कार, जेठानंद पंवार को दुर्गेश युवा साहित्य पुरस्कार अर्पित किया गया। सम्मान स्वरूप प्रशस्ति—पत्र, माल्यार्पण, साफा पहनाकर सम्मानित किया। साहित्यकार नागराज शर्मा, संतोष चौधरी, मदन सैनी, सगमानंद, जेठानंद आदि वक्ताओं ने अपनी रचना प्रक्रिया पर बात की। इस दौरान बड़ी संख्या में साहित्यकार, साहित्य प्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संचालन कमल शर्मा ने किया। आभार साहित्यकार उम्मेद गोठवाल ने जताया।

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