नहरबंदी
हैलो बीकानेर। काफी वर्षो पहले एक फिल्म आई थी जिसका एक डायलॉग काफी प्रसिद्ध हुआ था। कि 'एक चुटकी सिदुर कि किमत तूम क्या जानों रमेश बाबू इसका डायलॉग का मतलब था कि जो सिंदूर स्त्री अपने माथे पर लगाती है उसकी किमत नशे में धुत रहने वाले व्यक्ति को क्या पता। इसी डायलॉग पर इस न्यूज की हैडिंग बनाई गई है।
नहरबंदी के दौरान बीकानेर में एक तरफ जहां बूंद-बूंद पानी को पूरा बीकानेर शहर तरस रहा है वहीं डूडी पेट्रोल पंप रोड़ पर स्थित रंगोलाई के पास जो जलदाय विभाग के कुंए से व्यर्थ बहता पानी देख लोगों के जुबान पर यही शब्द थे कि इस बहते पानी की किमत क्या जाने जलदाय विभाग, विभाग की इस लापरवाही की वजह से शहर के हजारों लोगों की प्यास बुझ सकती थी। लेकिन यह पानी बहता देख लोगों को काफी दुखी हुवें।
नहरबंदी तो जल्द ही समाप्त होने वाली है। लेकिन जब तक नहर का पानी शोभासर और बिछवाल जलाशयों में नहीं आता तब तक एक दिन छोड़ एक दिन पानी की सप्लाई से शहरवासी काफी परेशान रहते है। विभाग इतना लापरवाह है कि यह पानी काफी देर तक सड़क पर बहता रहा लेकिन विभाग ने इस पर तुरंत कार्यवाही तक नहीं की। खैर होना था जो हो गया। परेशान जनता हुई। प्यासे लोग रहे।
सूना है विभाग ने जिस मुंबई की कंपनी को शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पानी की नई लाइन बिछाने का आदेश दिया था वो कंपनी विभाग की सून तक नहीं रही। माह दिसंबर 2025 में जिस नई लाइन बिछाने का आदेश कंपनी को दिया गया था वो काम अभी तक कंपनी ने शुरू तक नहीं किया। विभाग के अधिकारी इस बात से अवगत है लेकिन कर कुछ नहीं सकते पता नही क्यूँ ....
Join for Latest News
हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ