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व्यक्ति की स्मृतियों को झकझोर देने वाली अद्भुत प्रदर्शनी-बुलाकी शर्मा

1 month ago
व्यक्ति की स्मृतियों को झकझोर देने वाली अद्भुत प्रदर्शनी-बुलाकी शर्मा
बीकानेर। राजस्थानी साफा, पाग-पगड़ी, कला संस्थान एवं थार विरासत की ओर से 539वें नगर स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित छः दिवसीय ‘उछब थरपणा’ के छठे दिन लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन-सदन में अनूठी और बीकानेर में पहली बार हजारों खाली माचिस खाली पेटी की युवा संग्रहकर्ता भानुप्रताप डूडी के महत्वपूर्ण संग्रह की प्रदर्शनी लगाई गई। जो अपने आप में एक नवाचार था।
 
 
प्रदर्शनी के उद्घाटन की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वरिष्ठ साहित्यकार-व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने व्यक्ति की स्मृतियों को झकझोर देने वाली माचिस की खाली डिब्बियों की अद्भुत प्रदर्शनी में उनके हजारों चित्रों ने मन मोह लिया। ऐसी सुसज्जित प्रदर्शनी के युवा संग्रहकर्ता भानुप्रताप डूडी की प्रशंसा करते हुए उसे आर्शीवाद देते हुए आयोजन बाबत दोनों संस्थाओं का साधुवाद किया।  शर्मा ने आगे कहा कि ऐसी प्रदर्शनी को देखते हुए मेरे बचपन की यादें ताजा हो गई, जब हम इन्हीें माचिस की डिब्बियों से खेल खेला करते थे। और इनको संग्रहित करने की भी हम मित्रों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रहती थी। 
 
 
शर्मा ने कहा कि ऐसी प्रदर्शनी नई पीढ़ी को अपने अतीत के दौर और उसके वैभव से रूबरू कराती है। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के सचिव शरद केवलिया ने कहा कि यह प्रदर्शनी खासतौर से युवा पीढ़ी के लिए ज्ञान का स्त्रोत है। माचिस की इन हजारों डिब्बियों में देश और विदेश से जुड़ी अनेक घटनाएं समसामयिक विषय, महापुरूषों आदि के चित्रों के माध्यम से हमारे संचित ज्ञान की स्मृति में फिर एक नई चेतना का संचार होता है। केवलिया ने आगे कहा कि ऐसे आयोजन स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों की महत्ता को रेख्ंााकित करते हैं।
 
 
 
उछब थरपणा के समापन अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि नई पीढ़ी को इसे देखना और अपने अतीत के वैभव से रूबरू होना चाहिए। क्योंकि आज के दौर में माचिस कि डिब्बी का चलन करीब-करीब खत्म हो गया है। ऐसे समय में यह नवाचार प्रशंसनीय है। प्रारंभ में नगर स्थापना दिवस के अवसर पर छः दिवसीय उछब थरपणा समारोह के संयोजक शिक्षाविद् राजेश रंगा ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि विभिन्न आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी विरासत, धरोहर, कला एव परंपरा आदि से रूबरू होने का अवसर मिलता है।
 
 
 
इस अद्भुत प्रदर्शनी को सैकड़ों बालक-बालिकाओं ने बड़े उत्साह एवं उमंग के साथ देखा और सभी ने युवा संग्रहकर्ता भानुप्रताप डूडी की प्रशंसा कर उनकी रूची एवं संग्रह से जुड़ी जानकारियां ली। इस अवसर पर भवानी सिंह राठौड, हरिनारायण आचार्य, हेमलता व्यास, अंजू राव, राजेश्वरी व्यास, चंपालाल गहलोत, अशोक शर्मा, नवनीत व्यास, अख्तर अली, घनश्याम ओझा, तोलाराम सारण, भैरूरतन, इन्द्रजीत, राहुल, पुनीत कुमार रंगा, श्रीमती मीना, आलोक जोशी, विजयसिंह चौहान, भंवर मोदी, रामलाल जाट सहित अनेकों गणमान्यों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर उसकी भूरी-भूरी प्रशंसा की।
 
 
प्रदर्शनी के उद्घाटन एवं छः दिवसीय उछब थरपणा के समापन समारोह का संचालन कला विश्ेाष कृष्णचंद पुरोहित ने किया एवं सभी का आभार संस्कृतिकर्मी आशीष रंगा ने ज्ञापित किया।

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